कोयला घोटाले में बड़ा फैसला : सुप्रीम कोर्ट से रानू साहू और सौम्या चौरसिया समेत 9 आरोपियों को अंतरिम जमानत…

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और सौम्या चौरसिया समेत 9 आरोपियों को अंतरिम जमानत मिल गई है। यह फैसला न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति कोटेश्वर सिंह की पीठ ने सुनाया। गंभीर आर्थिक अपराधों से जुड़े इस मामले में कोर्ट का यह आदेश बड़े निहितार्थ लिए हुए है।
कौन-कौन आरोपी जमानत पर बाहर? : सुप्रीम कोर्ट ने रानू साहू और सौम्या चौरसिया के अलावा जिन अन्य आरोपियों को जमानत दी है, उनमें:
- दीपेश टांक
- राहुल कुमार सिंह
- शिव शंकर नाग
- हेमंत जायसवाल
- चंद्रप्रकाश जायसवाल
- संदीप कुमार नायक
- रोशन कुमार सिंह
- शेख मोइनुद्दीन कुरैशी
क्या है कोयला घोटाला? : छत्तीसगढ़ में सरकारी संरक्षण में चले अवैध कोयला लेवी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 540 करोड़ रुपये के हेरफेर का पर्दाफाश किया था। आरोप है कि खनन माफियाओं और नौकरशाहों के गठजोड़ ने एक समानांतर टैक्स सिस्टम खड़ा कर लिया था, जिसमें हर टन कोयले पर अवैध वसूली होती थी। इस काले खेल का केंद्र रानू साहू और सौम्या चौरसिया को बताया गया था, जो राजनीतिक गलियारों में भी गहरी पैठ रखती थीं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों अहम? : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से आरोपियों को हिरासत में रखने के बावजूद ट्रायल शुरू नहीं हुआ है। लिहाजा, उनकी अंतरिम जमानत मंजूर की जाती है, लेकिन शर्तों के साथ।
- आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकते।
- सभी को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा।
- देश छोड़ने से पहले ट्रायल कोर्ट की अनुमति अनिवार्य होगी।
राजनीतिक मायने और आगे की राह : इस फैसले से छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल तेज हो गई है। कोयला घोटाले से जुड़ी गिरफ्तारियां पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुई थीं, और अब जब सत्ता परिवर्तन हुआ है, तो इस केस में नरमी का आरोप भी लग सकता है। हालांकि, यह केवल अंतरिम जमानत है। मुख्य सुनवाई में अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो फिर से गिरफ्तारी संभव है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच अब भी जारी है।