रायपुर

CGMSC Scam : अरबों के मेडिकल घोटाले का पर्दाफाश, मोक्षित कॉरपोरेशन के MD जेल में, तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज…

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अरबों रुपये के मेडिकल घोटाले का पर्दाफाश होते ही प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSC) में हुए इस महाघोटाले में भ्रष्टाचार निवारण स्पेशल कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मोक्षित कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर को 24 फरवरी तक जेल भेजने का आदेश दिया है।

इतना ही नहीं, इस घोटाले में आरोपी नंबर 4, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम (पंचकूला, हरियाणा) के तीन अधिकारियों—राजेश गुप्ता, अभिषेक कौशल और नीरज गुप्ता—द्वारा दाखिल अग्रिम जमानत याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे स्पष्ट है कि इस भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

कैसे संभव हुआ अरबों का घोटाला? : ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) और EOW (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ है कि CGMSC द्वारा मेडिकल उपकरणों की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडर में मोक्षित कॉरपोरेशन और उसकी सहयोगी कंपनियों को जानबूझकर ठेका दिया जाता था, जबकि अन्य कंपनियों को तकनीकी खामियों का हवाला देकर बाहर कर दिया जाता था। इस संगठित भ्रष्टाचार के जरिए सरकारी धन को निजी कंपनियों की जेब में डाला जा रहा था।

इन कंपनियों पर शिकंजा : सरकारी जांच एजेंसियों ने FIR में कई नामचीन कंपनियों और अधिकारियों को आरोपी बनाया है, जिनमें शामिल हैं:
मोक्षित कॉरपोरेशन, दुर्ग
CB कॉरपोरेशन, दुर्ग
रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम, पंचकूला (हरियाणा)
श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
स्वास्थ्य विभाग (DHS) और CGMSC के अधिकारी

भ्रष्टाचार का तंत्र: टेंडर से लेकर घूस तक :

  • CGMSC जब भी मेडिकल उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर जारी करता था, तो सिर्फ मोक्षित कॉरपोरेशन और उसकी सहयोगी कंपनियों को ही टेंडर अप्रूवल मिलता था।
  • अन्य कंपनियों को जानबूझकर अयोग्य घोषित कर दिया जाता था ताकि प्रतिस्पर्धा ही न रहे।
  • अधिकारियों और कंपनियों के बीच कमीशन का खेल चलता था, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान होता था।
  • नतीजा: घटिया मेडिकल उपकरण, जनता के पैसे की लूट, और मरीजों की जान से खिलवाड़।

क्या आगे और बड़े नाम होंगे बेनकाब?

✅ जांच एजेंसियों की नजर अब उन अधिकारियों पर है, जिन्होंने इन कंपनियों को टेंडर दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
✅ ACB-EOW जल्द ही कई और गिरफ्तारियां कर सकती है।
✅ सरकार पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त सजा दिलाए।

जनता में आक्रोश, सरकार पर सवाल : इस घोटाले के खुलासे के बाद जनता में भारी आक्रोश है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इस धांधली ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता पर पहले ही सवाल उठते रहे हैं, और अब इस घोटाले ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

अब सभी की नजर इस पर टिकी है कि सरकार इस महाघोटाले में शामिल भ्रष्ट अधिकारियों और कंपनियों पर कितनी सख्त कार्रवाई करती है। क्या सच में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी, या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? जनता जवाब चाहती है, और इस बार कोई भी बहाना स्वीकार नहीं होगा!

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