कुसमी के आश्रम-छात्रावासों में नियमों को ताक पर रख ‘मेहरबानी’ का खेल: एक शिक्षक को दो-दो संस्थाओं की कमान, दूसरे ब्लॉक से लाकर भी नवाजा…

- सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना: 2019 और 2023 के विभागीय निर्देशों को दरकिनार कर बंटा प्रभार; नौनिहालों की सुरक्षा और व्यवस्था भगवान भरोसे…
बलरामपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत कुसमी विकासखंड में संचालित आश्रम-छात्रावासों में प्रशासनिक मनमानी और नियमों की अनदेखी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सुदूर वनांचल में रहकर पढ़ाई करने वाले मासूम छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और संस्थाओं की दैनिक निगरानी को ताक पर रखकर चहेतों पर ‘दोहरी कृपा’ बरसाई गई है। यहां एक-एक शिक्षक को दो-दो संस्थाओं का प्रभार सौंप दिया गया है। इतना ही नहीं, नियमों को ठेंगा दिखाते हुए दूसरे विकासखंड से शिक्षक लाकर यहां दोहरे प्रभार की ‘रेवड़ी’ बांटे जाने का गंभीर आरोप लगा है।

सरकारी आदेश फाइलों में दफन, जमीन पर मनमर्जी का राज – आश्रम-छात्रावासों के संचालन और अधीक्षकों की पदस्थापना को लेकर शासन के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं, लेकिन कुसमी में इन आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया दिखता है:
- जीएडी का ऐतिहासिक आदेश (05 मार्च 2019) : सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक एफ 1-2/2015/1/एक की कंडिका-5 में स्पष्ट प्रावधान है कि आदिम जाति विकास विभाग के अधीन आश्रम/छात्रावासों में जब तक नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कार्यरत अमले को ही यथास्थिति प्रतिनियुक्ति या प्रभार में रखा जाए।
- विभागीय रिमाइंडर पत्र (13 सितंबर 2023) : आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, मंत्रालय (महानदी भवन) द्वारा जारी पत्र क्रमांक एफ 9-7/2010/25-1 (हस्ताक्षरित: अवर सचिव सरोजनी टोप्पो) के तहत समस्त सहायक आयुक्तों और जिला शिक्षा अधिकारियों को 2019 के आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
बड़ा सवाल: जब शासन का स्पष्ट निर्देश है, तो फिर किस सक्षम अधिकारी की शह पर नियमों को ताक पर रखकर एक ही शिक्षक को दो संस्थाओं का प्रभार थमा दिया गया?
मीलों की दूरी, एक प्रभारी: भगवान भरोसे मासूमों की जिंदगी! – कुसमी में जिन संस्थाओं का दोहरा प्रभार दिया गया है, उनमें से कई संस्थाएं एक-दूसरे से कई किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
- दैनिक निगरानी पर ग्रहण : सुबह की प्रार्थना से लेकर रात के भोजन, साफ-सफाई, बच्चों के स्वास्थ्य, मीनू के अनुसार पोषण और अनुशासन की निगरानी एक ही व्यक्ति दो अलग-अलग जगहों पर एक साथ कैसे कर सकता है?
- आपातकाल में कौन जिम्मेदार? : यदि रात के वक्त किसी एक छात्रावास में किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ती है या कोई अनहोनी होती है, और प्रभारी शिक्षक दूसरे हॉस्टल में मौजूद है, तो उस आपात स्थिति में जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के इंतजार में है?
दूसरे ब्लॉक से लाकर ‘उपकृत’ करने का खेल : आखिर क्या है राज? – इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि दूसरे विकासखंड में पदस्थ शिक्षक को कुसमी लाकर दो-दो छात्रावासों का प्रभार सौंप दिया गया।
- क्या स्थानीय स्तर पर योग्य शिक्षकों का अकाल पड़ गया था?
- दूसरे ब्लॉक के शिक्षक को यहां लाने का वैध प्रशासनिक आधार और अनुमोदन आदेश कहां है?
- क्या मूल पदस्थापना वाले विकासखंड और विभाग से विधिवत अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया गया?
- सीमा लांघकर की गई इस ‘विशेष कृपा’ के पीछे कौन सा रसूख काम कर रहा है?
बैकफुट पर प्रशासन : मंडल संयोजक की ‘NOC’ वाली दलील पर उठे सवाल – मामला तूल पकड़ते ही प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है। बचाव में उतरे मंडल संयोजक का कहना है कि—
“संबंधित शिक्षकों द्वारा एनओसी देने के बाद ही उन्हें अधीक्षक बनाया गया है। अब शासन का नया निर्देश मिला है, जिसके तहत एक सप्ताह के भीतर सभी छात्रावासों में ‘एक संस्था-एक अधीक्षक’ की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।”
सवालों के घेरे में बयान : प्रशासन का यह बयान खुद अपने ही बुने जाल में फंसता नजर आ रहा है। यदि व्यवस्था नियमसम्मत थी, तो अब आनन-फानन में एक हफ्ते के अंदर व्यवस्था बदलने की मजबूरी क्यों आ पड़ी? क्या यह इस बात का सीधा स्वीकारोक्ति नहीं है कि अब तक की गई व्यवस्था पूरी तरह नियम-विरुद्ध थी?
जनता और जागरूक वर्ग की दो टूक मांग : सार्वजनिक हो पूरी सूची – इस पूरे फर्जीवाड़े और मनमानी पर पर्दा डालने की कोशिशों के बीच स्थानीय स्तर पर उच्चस्तरीय जांच और पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है:
- सूची सार्वजनिक हो : कुसमी विकासखंड के सभी आश्रम-छात्रावासों की वर्तमान अधीक्षक सूची, उनकी मूल पदस्थापना, आदेश क्रमांक और दिनांक तत्काल सार्वजनिक की जाए।
- NOC और ट्रांसफर फाइलों की जांच : दूसरे ब्लॉक से लाए गए शिक्षकों के स्थानांतरण/प्रभार संबंधी मूल नोटशीट की निष्पक्ष जांच हो।
- जवाबदेही तय हो : नियमों की अनदेखी कर दोहरे प्रभार का तुगलकी फरमान जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग सचमुच एक सप्ताह के भीतर इस दोहरी प्रभार व्यवस्था का खात्मा कर पारदर्शी पदस्थापना करेगा, या फिर प्रशासनिक लीपापोती कर नौनिहालों के भविष्य और सुरक्षा के साथ यह खिलवाड़ बदस्तूर जारी रहेगा!




