शहर में अवैध सट्टा कारोबार : छापेमारी या खानापूर्ति? पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत पर उठे सवाल…

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले में राजहरा शहर से लेकर आसपास के गांवों तक अवैध सट्टा कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है और पुलिस-प्रशासन की चुप्पी इस काले धंधे को बढ़ावा दे रही है। थाना गुरुर से हाल ही में राजहरा थाना तबादले में आए राजहरा प्रभारी तुलसिंह पट्टावी के तबादले के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सट्टा माफियाओं पर शिकंजा कसा जाएगा, लेकिन तुलसिंह पट्टावी का कार्यकाल भी “जीरो एक्शन” साबित हो रहा है। सूत्रों का दावा है कि पुलिसकर्मी सट्टा व्यापारियों को पूर्व सूचना देकर छापेमारी को नकली अभियान बना देते हैं।
यह अवैध कारोबार शहर के नए बस स्टैंड, गांधी चौक, पंडर दल्ली, निर्मला सेक्टर, पुराना बाजार, 256 चौक, इंदिरा नगर, हॉस्पिटल सेक्टर, रेलवे कालोनी समेत प्रमुख चौराहों पर फैला हुआ है। ग्रामीण इलाकों में चिखलाकसा, कोण्डे, मानपुर चौक, खलारी, अडजाल और गुजरा गांवों तक सट्टा एजेंटों का नेटवर्क सक्रिय है। फोन पर नंबर बताकर पैसों का लेन-देन करने वाले ये एजेंट स्थानीय युवाओं को सट्टे का लालच देकर फंसा रहे हैं। गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इसके में अवैध सट्टा कारोबार की पूरी बागडोर दल्ली राजहरा के पंडर दल्ली से संचालित की जा रही है जहां बाप बेटे पूरी जिम्मेदारी और दबंगई से इस कारोबार को चला रहे है। जिनकी गिरफ्तारी में ही पुलिस के हाथ पांव फूल जाते है वही उनकी गाड़ी का डीजल खत्म हो जाता है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि राजहरा थाना प्रभारी तुलसिंह पट्टावी के आने के बाद भी सट्टा माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। पट्टावी की टीम पर छापेमारी से पहले एजेंटों को अलर्ट करने का भी संदेह जताया जा रहा है। नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “ऊपर से दबाव है कि केवल छोटे मुंहबोले एजेंटों को ही टारगेट कर, बड़े सटोरियों को बचाया जाता है।”
मामले में राजहरा सीएसपी डॉ. चित्रा वर्मा और बालोद पुलिस अधीक्षक सुरजन भगत की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। वहीं “एसपी साहब को हर बैठक में सट्टा रैकेट पर एक्शन का दावा करते देखे जाते है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है।” वहीं, सीएसपी डॉ. वर्मा का कहना है कि “अवैध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।”
“सट्टे और जुए में डूबे परिवारों की चीखें” यह बताती है कि शहर के कई परिवार इस काले खेल में अपना सब कुछ गंवा बैठे है। आपको बता दें कि अवैध सट्टा कारोबार की वजह से शहर के कई लोग खासकर युवा आत्महत्या कर चुके है और कई कोशिश भी कर चुके है, लेकिन पुलिस को इससे कोई लेना देना नहीं है। ऐसे सैकड़ों मामले हैं, जहां लोगों ने जमीन-जायदाद तक गंवा दी।
शहर के नागरिक पुलिस प्रशासन से पूछ रहे क्यों नहीं रुक रहा यह धंधा? सूत्रों के मुताबिक, सट्टा माफिया हर महीने पुलिस और नेताओं को लाखों रुपए की रिश्वत देकर सिस्टम को चुप करा रहा है। शहर में चर्चा है कि पुलिस विभाग “सट्टा मुक्त राजहरा” का पोस्टर दिखाकर पुलिस मीटिंग में तारीफ बटोरती है, लेकिन अंदर से फाइलों पर धूल जमी है।
शहर के संभ्रांत नागरिकों का कहना है कि राजहरा थाना प्रभारी तुलसिंह पट्टावी को तत्काल निलंबित किया जाए। राजहरा सीएसपी डॉ. चित्रा वर्मा और एसपी सुरजन भगत की जवाबदेही तय हो। सट्टा नेटवर्क से जुड़े बड़े सटोरियों के खिलाफ विभागीय जांच की जाए। यह रिपोर्ट पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के काले चेहरे को उजागर करती है। अब देखना है कि उच्च स्तर पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या फिर “अवैध सट्टा कारोबार” का यह खेल आगे भी जारी रहेगा।