मानवता की मिसाल : युवाओं ने दलदल में फंसी गौमाता को बचाकर दिखाई सेवा और संवेदना की अद्भुत झलक

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/अर्जुन्दा। जिले के गुण्डरदेही विकासखंड के अंतर्गत अर्जुन्दा तहसील के ग्राम डुड़िया में मानवता और साहस की एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। जहां गांव के कुछ जज्बे से भरे युवाओं ने दलदल में फंसी एक गौमाता की जान बचाकर न केवल अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया, बल्कि समाज को जीवों के प्रति करुणा और कर्तव्य की भावना का संदेश भी दिया।
घटना ग्राम डुड़िया के एक खेत की है, जहां एक गौमाता, दलदल में बुरी तरह फंस गई थी। दलदल में धीरे-धीरे धंसती जा रही गाय की स्थिति बेहद नाजुक हो चुकी थी और यदि समय पर मदद नहीं मिलती, तो उसकी जान भी जा सकती थी। जैसे ही गांव के युवाओं को इस बात की जानकारी मिली, उन्होंने बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू कार्य शुरू कर दिया।
बचाव कार्य में जुटे युवाओं – यशवंत कुमार टंडन, जीतराम टंडन, रामाधार टंडन, प्रियांचल टंडन, अनमोल टंडन और लिकेश टंडन – ने आपसी तालमेल के साथ साहस दिखाते हुए लकड़ियों, रस्सियों और अपने हाथों से दलदल को हटाते हुए गौमाता को धीरे-धीरे बाहर निकाला। लगभग एक घंटे की अथक मेहनत के बाद आखिरकार सभी की कोशिश रंग लाई और गौमाता को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
इस कार्य में अग्रणी भूमिका निभाने वाले यशवंत कुमार टंडन ने बताया, “गौमाता संकट में थी। हमसे देखा नहीं गया और हम सबने तुरंत मिलकर उसे बचाने का निर्णय लिया। यह केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारे लिए पूज्यनीय जीव है। उसे बचाना हमारी ज़िम्मेदारी थी और हम खुश हैं कि हम सफल रहे।”
घटना के बाद पूरे गांव में युवाओं के इस साहसिक प्रयास की जमकर सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आज के समय में जब लोग अपने कामों में व्यस्त रहते हैं, ऐसे में इन युवाओं ने जो किया, वह समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है।
इस घटना ने यह भी साबित किया है कि जब संवेदना और सहयोग की भावना साथ हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती को भी मात दी जा सकती है। साथ ही, यह उदाहरण हमें यह भी सिखाता है कि समाज में चाहे मानव हो या पशु, हर प्राणी की मदद करना ही असली सेवा और धर्म है।
ग्राम डुड़िया के इन युवाओं की यह पहल मानवता और करुणा की एक सुंदर मिसाल बनकर सामने आई है।