आईपीएल के दौरान होगा बालोद जिले में सट्टेबाजों का ‘धमाल’! पुलिस की ‘सुस्ती’ पर उठ रहे सवाल

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जैसे ही आईपीएल का बिगुल बजने वाला है, वैसे ही बालोद जिले के गलियारों में सट्टेबाजों की ‘धमाकेदार’ तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। क्रिकेट के इस महाकुंभ में जहाँ टीमें मैदान में जीत के लिए जूझेंगी, वहीं सटोरिए ‘गेंद-बल्ले’ नहीं, बल्कि युवाओं की कमाई पर निशाना साधने को तैयार हैं। हैरानी की बात यह है कि पुलिस प्रशासन इस अवैध जुआ सट्टा कारोबार के खिलाफ कार्यवाही के बजाय ‘थर्ड अंपायर’ बना बैठा है!
सूत्रों के मुताबिक, सट्टेबाजों के पास खास मोबाइल नंबरों का जाल है, जिन पर मैच का हर अपडेट टीवी प्रसारण से 40 सेकंड पहले पहुँच जाता है। इस ‘सुपरफास्ट स्कोर’ के दम पर बड़े सटोरिए लाखों रुपए की बाजी लगाते हैं। इस बार तो नए छोटे सटोरिए भी मैदान में कूद पड़े हैं, जिन्हें पुलिस की ‘आँखों का तारा’ बताया जा रहा है।
मैच को चार हिस्सों में बाँटकर होता है सट्टा! सट्टे का यह खेल कोई ‘कैजुअल गेम’ नहीं है। पूरी प्लानिंग के साथ मैच को चार हिस्सों में बाँटा जाता है जिसमें पहले 10 ओवर के रन, अगले 10 ओवर के रन, पावर प्ले में विकेट और आखिरी गेंद तक का ‘थ्रिलर’। यहाँ तक कि हर बॉल पर सट्टा लगता है! नजदीकी मुकाबलों के आखिरी ओवरों में तो सटोरिए ‘ऑल इन’ कर देते हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सट्टेबाजी का यह कारोबार पुलिस की नाक के नीचे चल रहा होता है। बालोद जिले के दल्ली राजहरा व अन्य इलाकों में 10-15 बड़े सटोरिए खुलेआम सक्रिय हैं, लेकिन थाने के रिकॉर्ड में यह ‘गेम’ गायब है! सूत्र बताते हैं कि नए सिम कार्ड और शहर से बाहर बैठे “पंटर” इस कारोबार को ‘सिक्योर’ बना रहे हैं।
गुप्त सूत्रों का दावा है कि सट्टेबाजों ने दल्ली-राजहरा के मौजूदा थाना प्रभारी सुनील तिर्की को हटाने की पूरी कोशिश की है, जो अब तक उनके रास्ते का रोड़ा बने हुए थे। अब उनके तबादले और तूल सिंह पट्टावी की तैनाती की चर्चा जोरो पर है। सवाल यह है क्या पुलिस विभाग का यह ‘पोस्टिंग गेम’ सटोरियों की जीत साबित होगी? आपको बता दें कि पूरे जिले में सबसे ज्यादा आईपीएल सट्टे का खेल एक शहर से संचालित होता है वही दो भाई ही इसके बड़े खिलाड़ी है वही इनमें से एक भाई नगरीय निकाय चुनाव में टिकिट पाकर पार्षद बन बैठा है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पहुंच का जोर लगाकर अपने ‘चहेते सूबेदार को कुर्सी पर बिठाने पूरी जुगत’ लगा दी है वही जिले के पुलिस कप्तान भी असमंजस में अपना सिर खुजला रहे है।
युवाओं की ‘गाढ़ी कमाई’ पर सट्टे का खतरा! इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा शिकार युवा वर्ग बन रहा है। सटोरिए उन्हें ‘क्विक रिच’ (तत्काल अमीर) के सपने दिखाकर उनकी मेहनत की कमाई को ‘हवा’ कर रहे हैं। पुलिस की चुप्पी पर स्थानीय नागरिकों का गुस्सा साफ झलक रहा है : “जब तक बड़ी मछली नहीं फँसेंगी, यह खेल थमने वाला नहीं!”
अब सवाल उठता है कि क्या इस बार पुलिस ‘मैच फिक्स’ करेगी? आईपीएल से पहले पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी की खबर तो आ रही हैं, लेकिन जमीन पर एक्शन नहीं दिख रहा। क्या यह ‘स्पॉट फिक्सिंग’ के खिलाफ वास्तविक कार्यवाही होगी या फिर ‘पावर प्ले’ सिर्फ मैदान तक सीमित रहेगा? पूरा जिला इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है।