“सोशल मीडिया : नफरत की फैक्ट्री या समाज की कब्रगाह?”

सोशल मीडिया, जो कभी विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का मंच था, आज नफरत और सांप्रदायिकता की प्रयोगशाला बन चुका है। नागपुर में औरंगजेब का पुतला जलाने का वीडियो वायरल होते ही शहर में हिंसा भड़क उठी। पथराव, आगजनी और सांप्रदायिक टकराव ने यह साबित कर दिया कि अब सोशल मीडिया समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहा है।
सोशल मीडिया: समाज को बर्बाद करने का नया हथियार : आज सोशल मीडिया महज एक प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि एक ऐसा जहर है, जिसने समाज के हर वर्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। जहां पहले यह संवाद का माध्यम था, अब यह फेक न्यूज, अफवाहें, भड़काऊ पोस्ट और मॉर्फ किए गए वीडियो का अड्डा बन चुका है। कुछ सेकंड में ही कोई झूठी खबर लाखों लोगों तक पहुंच जाती है और नतीजा – सड़कों पर दंगे, खून-खराबा और जान-माल का नुकसान!
राजनीति, धर्म और सोशल मीडिया: आग में घी डालने का खेल : राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और चरमपंथी गुटों के लिए सोशल मीडिया सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। आईटी सेल और ट्रोल आर्मी दिन-रात झूठ और नफरत फैलाने में जुटे हैं। हर चुनाव से पहले फेक वीडियो, डीपफेक ऑडियो और गढ़ी हुई कहानियों की बाढ़ आ जाती है, जिससे समाज में तनाव बढ़ता है।
क्यों सोशल मीडिया पर युवाओं को बनाया जा रहा है निशाना? : सबसे चिंताजनक बात यह है कि सोशल मीडिया पर युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। कट्टरपंथी गुट और राजनीतिक दल झूठी विचारधारा, धार्मिक उन्माद और जातिवादी नफरत का ऐसा ज़हर परोस रहे हैं, जिससे युवा भ्रमित होकर हिंसा की ओर बढ़ रहे हैं।
क्या सोशल मीडिया पर लगाम लगेगी या बर्बादी तय है? : सरकार और सोशल मीडिया कंपनियां सिर्फ बयानबाजी करती हैं। भड़काऊ पोस्ट रोकने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। फेक न्यूज और अफवाहों पर रोक लगाने के बजाय, राजनीतिक फायदे के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर जल्द ही इस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो सोशल मीडिया के ज़हर से पूरा समाज बर्बाद हो जाएगा!
अगर अब भी नहीं संभले, तो बहुत देर हो जाएगी : सोशल मीडिया एक टाइम बम बन चुका है, जो किसी भी वक्त बड़े धमाके के साथ समाज को झुलसा सकता है। अब वक्त आ गया है कि हम तय करें – सोशल मीडिया को जागरूकता का माध्यम बनाएंगे या इसे नफरत और बर्बादी का ज़रिया बनने देंगे? अगर नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी!