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सरकारी बस में बलात्कार कांड : आरोपी के राजनीतिक कनेक्शन उजागर, विपक्ष ने सरकार को घेरा…

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में सरकारी बस में हुए बलात्कार मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घिनौने अपराध के आरोपी दत्तात्रय रामदास गाडे (37) की तस्वीरें कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के साथ सामने आने के बाद मामला और गरमा गया है। गाडे पर पहले से ही चोरी और डकैती के छह मामले दर्ज थे, बावजूद इसके वह खुलेआम समाज में घूम रहा था।

कैसे हुआ यह शर्मनाक अपराध? : मंगलवार को पुणे के स्वारगेट बस डिपो परिसर में खड़ी एक सरकारी शिवशाही बस में 26 वर्षीय महिला के साथ गाडे ने कथित रूप से बलात्कार किया। घटना के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन जैसे ही उसकी राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आईं, मामला सिर्फ अपराध तक सीमित न रहकर राजनीति से भी जुड़ गया।

राजनीतिक कनेक्शन पर बवाल : सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में गाडे को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के विधायक मौली कटके और पूर्व विधायक अशोक पवार के साथ देखा जा सकता है। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं और आरोपी के राजनीतिक संबंधों की गहराई से जांच की मांग की है।

नेताओं की सफाई: “कोई करीबी रिश्ता नहीं” : विधायक मौली कटके ने सफाई देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते कई लोग उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे किसी भी अपराधी के साथ संबंध रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी को फांसी दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न करे। पूर्व विधायक अशोक पवार ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया और कहा कि पुलिस को इस बात की गहन जांच करनी चाहिए कि आरोपी किसके लिए काम कर रहा था और उज्जैन की उसकी यात्रा का उद्देश्य क्या था।

विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला : महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि आरोपी गाडे सत्तारूढ़ दल के नेताओं के लिए काम करता था और उज्जैन यात्रा के दौरान उसने कई लोगों को वहां पहुंचाने का इंतजाम किया था। उन्होंने कहा, “मैं अभी किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन मेरे पास पुख्ता जानकारी है कि सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय विधायक ने उज्जैन यात्रा का आयोजन किया था और आरोपी इस काम का जिम्मेदार था। ऐसे में यह जांच होना जरूरी है कि क्या आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़ा था?”

सरकार का बचाव: “अपराधी सिर्फ अपराधी होता है” : इस पूरे मामले पर गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने सफाई देते हुए कहा कि आरोपी की राजनीतिक पृष्ठभूमि से इस अपराध का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “कानून की नजर में आरोपी सिर्फ एक अपराधी है। हम उसे किसी राजनीतिक या सामुदायिक समूह से नहीं जोड़ सकते। पुलिस का एकमात्र उद्देश्य आरोपी को न्याय के कटघरे में खड़ा करना है।”

बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था पर सवाल : इस शर्मनाक घटना ने पुणे और पूरे महाराष्ट्र में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहा है, तो वहीं सरकार इसे सिर्फ एक आपराधिक मामला बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रही है।

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्या खुलासे होते हैं—क्या यह मामला सिर्फ एक अपराध तक सीमित रहेगा, या फिर इसके तार कहीं बड़े राजनीतिक गठजोड़ से जुड़े पाए जाएंगे? विपक्षी दल इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और गरमा सकता है।

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