रायगढ़

लैलूंगा बना आंदोलन का अखाड़ा : पंचायत सचिवों की हड़ताल से सरकारी तंत्र ठप, अब सरपंच संघ ने भी दिया समर्थन, मुख्यमंत्री के नाम SDM को ज्ञापन…

• सरपंचों की बगावत से सरकार पर दोहरी मार, लैलूंगा में भड़का आंदोलन अब ज्वालामुखी बनने को तैयार!...

लैलूंगा : छत्तीसगढ़ में पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की मांग ने अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। लैलूंगा इस आंदोलन का केंद्र बन चुका है, जहां पंचायत सचिवों के साथ अब सरपंच भी आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हो गए हैं। सरकारी अनदेखी के खिलाफ यह आंदोलन अब बेकाबू होने की कगार पर है।

गांवों में ठप हुए विकास कार्य, ताले पड़े पंचायत भवनों पर : पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने ग्रामीण विकास कार्यों पर सीधा असर डाला है। मनरेगा मजदूरी भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धा पेंशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी मूलभूत सेवाएं ठप हो गई हैं। गाँवों में हताशा और गुस्सा बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन मौन साधे बैठा है।

लैलूंगा सरपंच संघ के अध्यक्ष शिव भगत ने सचिवों के आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए राज्य सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा – “पंचायत सचिव गांव की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार उनके अधिकार छीन रही है। यदि हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो गांव-गांव में ऐसा आंदोलन होगा कि सरकार को घुटनों पर आना पड़ेगा!”

सचिव संघ ने सरकार को दी चेतावनी – “अब आर-पार की लड़ाई !” सचिव संघ के नेताओं का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। उनका आरोप है कि सरकार सिर्फ खोखले वादे कर रही है, लेकिन ठोस निर्णय लेने से बच रही है। सचिवों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है- “अगर जल्द ही शासकीयकरण पर फैसला नहीं हुआ, तो हम उग्र आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। पंचायतों में कोई भी काम नहीं होगा, चाहे जनता को जितनी भी दिक्कत हो!”

क्या सरकार घुटने टेकेगी या आंदोलन और भड़क उठेगा? : अब सवाल यह है कि क्या सरकार पंचायत सचिवों की मांग मानकर उन्हें शासकीयकरण का तोहफा देगी, या फिर लैलूंगा से उठी यह ज्वाला पूरे राज्य में फैलेगी? सरकार की चुप्पी इस आंदोलन को और भड़काने का काम कर रही है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आग पूरे छत्तीसगढ़ में विकराल रूप ले सकती है!

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