लैलूंगा : केशला उपार्जन केंद्र में 48.67 लाख का महाघोटाला : कलेक्टर के एफआईआर आदेश से मचा हड़कंप…

रायगढ़। जिले में धान खरीदी घोटाले का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है! इस बार केशला उपार्जन केंद्र में 48.67 लाख रुपए के महाघोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिससे प्रशासन में खलबली मच गई है। कलेक्टर ने खुद मोर्चा संभालते हुए इस गड़बड़ी के दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।
फर्जीवाड़े की पूरी कहानी: कैसे हुआ घोटाला? : केशला केंद्र में 1554 क्विंटल धान की गड़बड़ी की गई। इसके अलावा 543 नग नया बारदाना और 21 नग पुराना बारदाना भी गबन किया गया। इस पूरे खेल की कीमत 48,67,881 रुपए आंकी गई है। घोटाले के पीछे जिनका खेल उजागर हुआ है, उनमें प्रभारी प्रबंधक गोकुलानंद पंडा, कंप्यूटर ऑपरेटर लालकुमार सिदार और खरीदी प्रभारी खेमराज शर्मा का नाम सामने आया है। तीनों को इस महाघोटाले का जिम्मेदार मानते हुए कलेक्टर ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है।
कैमरे के सामने चोरी! फिर भी सिस्टम बना मूकदर्शक : हर साल धान खरीदी में गड़बड़ी होती है, लेकिन इस बार तो हद ही पार कर दी गई! प्रशासन की ओर से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, नोडल अधिकारियों की तैनाती हुई, भौतिक सत्यापन भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद चंद लोगों ने पूरी व्यवस्था को ठेंगा दिखा दिया। फर्जी एंट्री कर धान की खरीद का खेल खेला गया और सरकारी रकम डकार ली गई।
अपेक्स बैंक की संलिप्तता! कब तक बचेंगे बड़े मगरमच्छ? : धान खरीदी में सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपेक्स बैंक की होती है, लेकिन सबसे ज्यादा गड़बड़ी भी यहीं से होती है! फर्जी लोन से लेकर कटमनी तक, हर जगह अपेक्स बैंक का खेल चलता है। अब जब घोटाले की आंच उनके ओएसडी तक पहुंची है, तो उनका मूड उखड़ गया है। लेकिन इस बार कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा!
अब और भी खुलासे होंगे! जांच की जद में कई बड़े नाम : केशला घोटाले से पहले तिउर और तमनार के खरीदी केंद्रों में भी गबन पकड़ा जा चुका है। अब जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। जिस तरह से धान खरीदी का गोरखधंधा चल रहा है, उससे साफ है कि जल्द ही और भी बड़े मगरमच्छ बेनकाब होंगे।
अब देखना ये है कि क्या प्रशासन इस बार सच में घोटालेबाजों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाएगा या फिर हमेशा की तरह मामला रफा-दफा हो जाएगा?