रायगढ़ में गौ तस्करी का महागठजोड़ : प्रशासन, पुलिस और सफेदपोशों की सरपरस्ती में बेखौफ तस्कर, सरकार के आदेश हवा में!…

रायगढ़। राज्य सरकार द्वारा गौ तस्करी पर सख्त कार्रवाई के आदेश के बावजूद अवैध गौवंश परिवहन धड़ल्ले से जारी है। पुलिस प्रशासन और कुछ सफेदपोशों की मिलीभगत से गौ तस्करी का यह काला कारोबार बंद होने का नाम नहीं ले रहा। सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड क्षेत्र में हजारों गौवंश को ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में बेधड़क तस्करी किया जा रहा है।
सरकार के सख्त आदेश, फिर भी बेखौफ तस्कर : डिप्टी सीएम विजय शर्मा द्वारा जारी नए आदेश के तहत गौवंश के अवैध परिवहन पर सात साल तक की सजा और 50,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय घोषित किया गया है। सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना गौवंश का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही,
- वाहन में फ्लेक्स लगाना अनिवार्य किया गया है।
- तस्करी में पकड़े गए वाहन को राजसात किया जाएगा।
- वाहन मालिक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।
- अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को चिन्हित कर कुर्क किया जाएगा।
- स्थानीय पुलिस प्रशासन की संलिप्तता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- नोडल अधिकारी की नियुक्ति कर हर जिले में गौ तस्करी पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
वनांचल क्षेत्र बना तस्करों का सेफ कॉरिडोर, पुलिस की भूमिका संदिग्ध : लैलूंगा क्षेत्र के हांड़ीपानी, तोलमा, आमापाली, झगरपुर, गमेकेला, बरदरहा, ढोरोबीजा, टांगरजोर, टोंघोपारा सहित सीमावर्ती इलाके अंतरराज्यीय गौ तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुके हैं। हर सोमवार और गुरुवार को लगने वाले बाजारों से तस्कर रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक बड़े स्तर पर गौवंश को क्रूरता से पीटते-मारते हुए ओडिशा तक ले जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, तस्करी को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। जिन थाना प्रभारियों को सूचना पहले ही दे दी जाती है, वे कोई कार्रवाई नहीं करते। ग्रामीणों के अनुसार, थाने में पदस्थ कुछ पुराने पुलिसकर्मी तस्करों को बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
हर हफ्ते 2000 से अधिक गौवंश की हो रही तस्करी :
- हर सप्ताह 1500 से 2000 गौवंश को अंतरराज्यीय स्तर पर तस्करी किया जा रहा है।
- तस्करी के लिए दिहाड़ी मजदूरों को 700-1000 रुपये देकर रात में गौवंश को पैदल हांककर ले जाया जाता है।
- ग्रामीणों द्वारा सूचना देने के बावजूद प्रशासन कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे रहता है।
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहे गंभीर सवाल : जब हमारी टीम ने इस पूरे मामले की पड़ताल की तो स्थानीय ग्रामीणों और गौ सेवकों ने दावा किया कि पुलिस प्रशासन पूरी तरह से तस्करों के साथ मिला हुआ है। सूचना देने के बावजूद पुलिस या तो कार्रवाई नहीं करती या तस्करों को बचाने का प्रयास करती है। अब सवाल उठता है कि जब सरकार ने कड़े कानून लागू कर दिए हैं, तो प्रशासन उन पर अमल क्यों नहीं कर रहा?
क्या सरकार के आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे या फिर इन संगठित तस्करों और उनके रक्षकों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी? अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध तस्करी के इस गोरखधंधे पर किस तरह की कार्रवाई की जाती है।