“भ्रष्टाचार देशद्रोह से भी गंभीर अपराध – मद्रास हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार!”

चेन्नई। भारत में भ्रष्टाचार अब केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रद्रोह के स्तर तक पहुंच चुका है! मद्रास हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भ्रष्ट न्यायिक अधिकारी और लोकसेवक देश के असली दुश्मन हैं और उन्हें देशद्रोही घोषित किया जाना चाहिए। जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम ने कहा कि भ्रष्टाचार संविधान का सबसे बड़ा दुश्मन है और अगर इसे नहीं रोका गया, तो यह पूरे देश को अंदर से खा जाएगा।
▶ जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है भ्रष्टाचार : न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यह जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है। सरकारी अस्पतालों में जन्म प्रमाण पत्र लेने से लेकर स्कूल में दाखिले तक, राशन कार्ड से लेकर सरकारी योजनाओं तक – हर जगह रिश्वतखोरी फैली हुई है। उन्होंने कहा, “सरकारी योजनाओं का लाभ भी बिना रिश्वत के नहीं मिलता, यह सिस्टम सड़ चुका है!”
▶ ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार-संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा’ : याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार होना लोकतंत्र और संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यदि न्याय दिलाने वाली व्यवस्था ही भ्रष्ट हो जाए, तो आम जनता का विश्वास पूरी तरह टूट जाएगा।
▶ ‘भ्रष्ट अधिकारी आतंकवादियों से भी खतरनाक’ : न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम ने आतंकवाद और भ्रष्टाचार की तुलना करते हुए कहा, “आतंकवादी हथियारों से देश को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन भ्रष्ट लोकसेवक पूरे सिस्टम को भीतर से दीमक की तरह चाट जाते हैं। ऐसे लोगों को आतंकवादियों की तरह देशद्रोही माना जाना चाहिए!”
▶ क्या अब सरकार उठाएगी बड़ा कदम? : हाईकोर्ट की इस ऐतिहासिक टिप्पणी के बाद सवाल उठता है-क्या सरकार अब रिश्वतखोर अधिकारियों और भ्रष्ट जजों पर देशद्रोह के कानून के तहत कार्रवाई करेगी? क्या रिश्वतखोरी को देशद्रोह की श्रेणी में रखा जाएगा? अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय प्रशासनिक इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव होगा।
अब भ्रष्टाचारियों की खैर नहीं- क्या देश देखेगा एक नई क्रांति? : मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नए युग की शुरुआत हो सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस पर कोई सख्त कदम उठाती है या फिर यह बयान भी अन्य न्यायिक टिप्पणियों की तरह बस बहस का मुद्दा बनकर रह जाएगा।