राष्ट्रीय

जनपक्षीय पत्रकारिता: अब जनता की आवाज़ दबेगी नहीं, गूंजेगी…

• सत्ता के सामने जनता की दहाड़ ; जब मीडिया खामोश, जनता बोलेगी-सच का बिगुल बज चुका है…

आज का दौर सूचना क्रांति का है, लेकिन क्या मीडिया वाकई जनता की आवाज़ उठा रहा है? क्या गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासी, दलित और वंचित समाज की समस्याएँ सुर्खियाँ बन रही हैं? या फिर मीडिया सिर्फ सत्ता और कॉर्पोरेट घरानों के इशारों पर नाच रहा है?

जब मुख्यधारा की पत्रकारिता जनता के सवालों से मुंह मोड़ ले, तब जनपक्षीय पत्रकारिता ही वह शक्ति बनती है, जो निडर होकर सच्चाई को उजागर करती है। यह पत्रकारिता किसी सरकार, किसी कंपनी या किसी संस्था के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ जनता के प्रति उत्तरदायी होती है।

जनपक्षीय पत्रकारिता: लोकतंत्र की असली प्रहरी : जनपक्षीय पत्रकारिता वह पत्रकारिता है जो –
गरीब की भूख, किसान की बेबसी, मजदूर का संघर्ष, और आम आदमी की तकलीफ को खबर बनाती है।
सत्ता के झूठे वादों को उजागर करती है और नीतियों की असलियत जनता तक पहुँचाती है।
हर जाति, धर्म, वर्ग और समुदाय को समान आवाज़ देने का काम करती है।
न्याय और समानता के लिए संघर्ष कर रहे लोगों की सच्ची साथी बनती है।

लेकिन क्या इस पत्रकारिता के लिए राह आसान है? बिल्कुल नहीं!

जब जनपक्षीय पत्रकार बनते हैं सत्ता के दुश्मन : जो भी पत्रकार सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करता है, उसे धमकियाँ दी जाती हैं, झूठे मुकदमों में फँसाया जाता है, कभी-कभी जान तक जोखिम में पड़ जाती है।

पत्रकारों पर हमले बढ़ रहे हैं!
मीडिया हाउस सत्ता के दबाव में झुक रहे हैं!
फेक न्यूज़ और प्रोपेगैंडा सच को दबाने की कोशिश कर रहे हैं!

लेकिन सवाल यह है – क्या जनता चुप बैठेगी?

जनपक्षीय पत्रकारिता: अब जनता की पत्रकारिता : अब वक्त आ गया है कि जनता अपनी आवाज़ खुद उठाए। डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारिता के माध्यम से सच्चाई को हर घर तक पहुँचाना जरूरी है।

अगर मुख्यधारा मीडिया जनता की खबरें नहीं दिखाएगा, तो जनता अपना खुद का मीडिया बनाएगी!

यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम, और ट्विटर पर जनपक्षीय पत्रकारों का नया आंदोलन शुरू हो चुका है!
स्वतंत्र वेबसाइट्स, ब्लॉग्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जनता की सच्ची आवाज़ गूंज रही है!
अब खबरें TRP के हिसाब से नहीं, बल्कि जनता की जरूरतों के हिसाब से बनेंगी!

जनपक्षीय पत्रकारिता का समर्थन करें – सच्चाई को ज़िंदा रखें : अगर आप चाहते हैं कि सच्चाई जिंदा रहे, गरीब की आवाज़ न दबाई जाए और लोकतंत्र मजबूत हो, तो जनपक्षीय पत्रकारिता का समर्थन करें!

स्वतंत्र पत्रकारों की रिपोर्टिंग देखें और साझा करें।
फेक न्यूज़ और प्रोपेगैंडा के खिलाफ जागरूक रहें।
ऐसे मीडिया संस्थानों को प्रोत्साहित करें जो निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहे हैं।

याद रखिए – अगर मीडिया जनता के साथ नहीं, तो जनता खुद अपना मीडिया बन जाएगी!

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